कलेक्टर ने साफ  किया  कि नहीं हटेगा इंदौर से लॉकडाउन

नगर संवाददाता
इंदौर। कोरोना को काफी हद तक इंदौर के प्रशासनिक अफसरों ने कंट्रोल में कर लिया है। अभी १७ मई के बाद लॉकडाउन की रूप रेखा क्या होगी यह स्थिति प्रधानमंत्री मोदी ने साफ नहीं की है लेकिन इस बीच कलेक्टर मनीष सिंह ने साफ कर दिया है कि अभी किसी तरह की रियायत १७ मई के बाद नहीं दी जाएगी। 
आगामी 31 मई तक लॉकडाउन का शहर में इसी तरह से सख्ती से पालन कराया जाएगा। कलेक्टर के इस वक्तव्य के बाद इंदौर के लोग काफी चिंतित हो गए हैं। दरअसल उनकी जेबें अब पूरी तरह खाली हो गई हैं और वह आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं हालांकि प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चौहान लोगों से यही अपील कर रहे हैं कि संकट की घड़ी हंै आप और हम, धैर्य बनाकर रखें तभी कोरोना से चल रही लड़ाई हम जीत पाएंगे।
  अब हर तरफ यही आवाज उठ रही है कि लॉकडाउन खोल दिया जाए, ताकि काम-धंधे पुन: शुरू हो सकें, लेकिन जिस तरह के हालात प्रदेश और देश में फिलहाल हैं उस स्थिति को देखकर प्रधानमंत्री मोदी भी यही चाह रहे हैं कि अभी लॉकडाउन के चौथे चरण की एक बार फिर घोषणा कर दी जाए। हालांकि अभी उन्होंने स्थिति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन इंदौर में जिस तरह के हालात अभी भी बने हुए हैं, उससे एक बात तो साफ है कि अभी प्रशासन यहां लॉकडाउन का 31 मई तक और सख्ती से पालन कराना चाहेगा ताकि कोरोना पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सके।  इस बीच कलेक्टर मनीष सिंह भी मीडिया के सामने आकर साफ कर गए कि हमने और इंदौर की जनता ने मिलकर काफी हद तक कोरोना को कंट्रोल में किया है और जिस तरह के हालात फिलहाल हैं उस हिसाब से अभी लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ाया जाएगा।  इस दौरान कोई भी धार्मिक स्थल नहीं खोला जाएगा और आगे भी लोगों को इसी तरह से लॉकडाउन का पालन करना होगा और जो व्यक्ति लॉकडाउन के खुलने की अफवाह फैलाएगा, उस पर रासुका की कार्रवाई तक के कलेक्टर मनीष सिंह ने संकेत दिए हैं। ऐसे में साफ हो गया है कि फिलहाल इंदौर से लॉकडाउन हटने वाला नहीं है और अभी शहरवासियों से प्रशासन ने और सहयोग की मांग की है।
पैसे का खड़ा हो गया संकट
 आम लोगों ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से लॉकडाउन है। ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। अब लॉकडाउन बढ़ेगा तो वह पैसे-पैसे को मोहताज हो जाएंगे। अब तक जो जमा पूंजी थी, उससे वह काम चला रहे थे, लेकिन अब तो हालात बद से बदतर हो गए हैं।  कहीं से भी  कोई मदद नहीं मिल पा रही है और जो राशन जनप्रतिनिधियों द्वारा दिया गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।
   लगातार पलायन कर रहे लोग
 आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग अब पैदल ही लगातार इंदौर से पलायन कर रहे हैं।  जैसी जिसकी व्यवस्था हो रही है वह अपने घर जाने के लिए निकल पड़ा है, क्योंकि अब उनमें हिम्मत नहीं बची है, क्योंकि उनके सामने अब दो जून रोटी का संकट खड़ा हो गया है।